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कार्यपालक परिषद

कार्यपालक परिषद (ई.सी.)
कार्यपालक परिषद संस्थान का प्रमुख कार्यपालक निकाय है, जो संस्थान के कार्य-व्यापार के परिचालन और प्रबंधन के लिए उत्तरदायी है। परिषद यह सुनिश्चित करता है कि शासी दस्तावेजों के अनुसार संस्थान के उद्देश्य पूरे हों, जिसमें संघ का ज्ञापन, नियम और उपनियम शामिल हैं। कार्यपालक परिषद संस्थान की निर्णय लेने वाली इकाई के रूप में कार्य करती है और शासी परिषद के समग्र पर्यवेक्षण के अधीन कुशल परिचालन हेतु प्राधिकृत है।
कार्यकपालक परिषद के प्रमुख कार्य और शक्तियाँ निम्नलिखित है:
1. नीति निर्माण: कार्यकपालक परिषद के समक्ष संस्थान के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु, व्यापक नीतियों को स्थिर करने का अधिकार है।
2. बजट समीक्षा और अनुमोदन: संस्थान के बजट प्राककलन की समीक्षा, संशोधन और अनुमोदन करना कार्यकारी परिषद की जिम्मेदारी है।
3. वित्तीय निरीक्षण: संस्थान के वित्तीय उपनियमों के अनुसार व्यय को स्वीकृति देने का अधिकार कार्यकपालक परिषद को है।
4. निवेश प्रबंधन: कार्यकपालक परिषद के समक्ष संस्थान के निधियों का प्रबंधन और निवेश करने का अधिकार है।
5. ऋण प्राधिकारी:कार्यकपालक परिषद को उचित समझे जाने वाले नियमों और शर्तों पर ऋण लेने का अधिकार है।
6. कर्मी नियुक्ति-:कार्यकपालक परिषद के समक्ष नए पद सृजित करने और कर्मचारियों की भर्ती और नियुक्ति की देखरेख करने का अधिकार है।

कार्यकारी परिषद के सदस्य
1. संयुक्त सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (राष्ट्रीय संस्थानों से संबंधित) – पदेन अध्यक्ष
2. संयुक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, पदेन सदस्य
3. डॉ. योगेश दुबे – सदस्य – दो वर्ष
4. डॉ. मोहित तांतिया – सदस्य – दो वर्ष
5. निदेशक, रा.ग.दि.सं., कोलकाता पदेन सदस्य – सचिव